संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया। अमेरिका ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि वह “आग से दूर हटे” और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के रास्ते पर लौटे। अमेरिकी प्रतिनिधि ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधि ने बैठक के दौरान कहा कि ईरान को टकराव की राजनीति छोड़कर कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “ईरान अगर क्षेत्रीय शांति चाहता है तो उसे उकसावे से दूर रहना होगा। ट्रंप प्रशासन के दौरान अपनाई गई सख्त लेकिन स्पष्ट नीति ही स्थिरता का रास्ता दिखा सकती है।”
अमेरिका का यह भी कहना था कि ईरान की मौजूदा गतिविधियां न केवल क्षेत्र के लिए बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
बैठक में अमेरिका ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल परीक्षण और क्षेत्रीय गुटों को समर्थन देने जैसे मुद्दों को उठाया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान की नीतियां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की भावना के खिलाफ हैं।
अमेरिका ने जोर देकर कहा कि प्रतिबंधों में ढील तभी संभव है, जब ईरान ठोस और भरोसेमंद कदम उठाए।
ईरान ने अमेरिकी बयान को राजनीतिक दबाव करार दिया। ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि अमेरिका दूसरों को सलाह देने से पहले अपनी नीतियों पर आत्ममंथन करे। ईरान का कहना है कि वह संप्रभु राष्ट्र है और अपने हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र फैसले लेने का अधिकार रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह बयान आगामी अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं से पहले दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। अगर दोनों देश संवाद का रास्ता नहीं अपनाते, तो क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका है।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह तीखी बयानबाज़ी किसी नई कूटनीतिक पहल में बदलती है या टकराव और बढ़ता है।