भारत में बढ़ते कैंसर मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कैंसर को देशव्यापी बीमारी (National Disease) घोषित करने की मांग वाली याचिका पर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर जनस्वास्थ्य संकट से जुड़ा बताते हुए सरकारों से नीतिगत स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि देशभर में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके इलाज, रोकथाम और जागरूकता के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति का अभाव है।
याचिका में मांग की गई है कि—
कैंसर को राष्ट्रीय बीमारी घोषित किया जाए
सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए
सस्ती और सुलभ इलाज सुविधाएं सुनिश्चित हों
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में जांच व उपचार केंद्र बढ़ाए जाएं
याचिका के अनुसार, कैंसर को राष्ट्रीय बीमारी घोषित करने से—
इलाज की लागत कम हो सकती है
बीमा कवरेज और सरकारी सहायता बढ़ेगी
रोकथाम और प्रारंभिक जांच पर अधिक फोकस होगा
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा
अदालत ने माना कि कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक चुनौती भी है, जिसका प्रभाव लाखों परिवारों पर पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से पूछा है कि—
कैंसर नियंत्रण के लिए मौजूदा नीतियां क्या हैं
राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत योजना क्यों नहीं है
इलाज और दवाओं को सस्ता करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं
सरकारों को निर्धारित समय-सीमा में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
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