राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में दर्ज किया गया। आनंद विहार में AQI 466 और मुंडका में 451 रिकॉर्ड किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों ने इसे दिल्ली में सांस लेने के लिए ‘आपातकाल’ जैसी स्थिति करार दिया है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके साथ ही, सर्दियों के मौसम में हवा की रफ्तार कम होना और तापमान में गिरावट प्रदूषक तत्वों को वातावरण में लंबे समय तक रोक लेती है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, इतना अधिक AQI स्तर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। प्रदूषित हवा के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, खांसी, सीने में जकड़न और सिरदर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थिति को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ग्रैप (GRAP) के कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल वाहनों पर सख्ती, और सड़कों पर पानी का छिड़काव जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, लोगों से घर से बाहर कम निकलने, मास्क पहनने और बच्चों को खुले में खेलने से रोकने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक दिल्ली की हवा हर सर्दी में इसी तरह ज़हरीली बनी रहेगी। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, ग्रीन एनर्जी, और कड़े पर्यावरण नियम ही लंबे समय में राहत दिला सकते हैं। फिलहाल, राजधानी की जनता के लिए साफ हवा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है
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