केंद्र सरकार का आम बजट 2026 इस बार कई मायनों में खास हो सकता है। वजह यह है कि 1 फरवरी 2026 रविवार को पड़ रहा है। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण परंपरा से हटकर छुट्टी के दिन ही बजट पेश कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों में एक अहम प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला माना जाएगा।
अब तक आमतौर पर बजट कार्यदिवस में ही पेश किया जाता रहा है। हालांकि, नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि बजट केवल कार्यदिवस में ही पेश किया जाए। पहले भी संसद की कार्यवाही जरूरत के हिसाब से सप्ताहांत में आयोजित की जाती रही है। ऐसे में सरकार अगर रविवार को बजट पेश करने का फैसला लेती है, तो इसे समय प्रबंधन और निरंतरता से जोड़कर देखा जाएगा।
सरकार के पास मुख्य रूप से तीन विकल्प हो सकते हैं:
पहला, 1 फरवरी रविवार को ही बजट पेश किया जाए।
दूसरा, बजट को 2 फरवरी (सोमवार) तक टाल दिया जाए।
तीसरा, विशेष संसदीय सत्र बुलाकर रविवार को कार्यदिवस घोषित किया जाए।
सूत्रों के अनुसार, सरकार बजट कैलेंडर में ज्यादा बदलाव नहीं चाहती, क्योंकि बजट से जुड़े आर्थिक फैसले, टैक्स बदलाव और नीतिगत घोषणाएं समय पर लागू करना जरूरी होता है।
अगर बजट रविवार को पेश होता है, तो शेयर बाजार उस दिन बंद रहेगा। ऐसे में बजट की घोषणाओं का असर अगले कार्यदिवस में बाजार पर दिखेगा। वहीं, आम जनता के लिए यह राहत भरा हो सकता है क्योंकि लोग छुट्टी के दिन बजट भाषण और प्रमुख घोषणाओं पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Union Budget 2026 में सरकार का फोकस इन प्रमुख मुद्दों पर रह सकता है:
मध्यम वर्ग को टैक्स राहत
महंगाई नियंत्रण
रोजगार सृजन और स्टार्टअप समर्थन
इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी
इसके अलावा, लोकसभा चुनावों के बाद का यह पहला पूर्ण बजट माना जा रहा है, इसलिए इससे आर्थिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं का साफ संकेत मिलने की उम्मीद है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार रविवार, 1 फरवरी को ही बजट पेश करेगी या तारीख में बदलाव होगा। जो भी फैसला हो, Union Budget 2026 देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है।
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