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दिल्ली में प्रदूषण की मार, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी छोड़ी मॉर्निंग वॉक, कहा- सुबह के तुलना शाम को रहता है कम

नई दिल्ली — राजधानी के बढ़ते प्रदूषण ने स्थिति इतनी बिगाड़ी है कि सूर्यकांत ने अपनी रोज़ की मॉर्निंग वॉक छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि 55 मिनट की सैर के बाद उन्हें शारीरिक असुविधा हुई — “अब तो शाम को भी बाहर जाना मुश्किल हो गया है

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दिल्ली में प्रदूषण की समस्या हर साल सर्दियों के मौसम में एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आती है। जहरीली हवा, धुंध और स्मॉग के कारण आम नागरिकों से लेकर उच्च पदस्थ अधिकारी तक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करते हैं। हाल ही में इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता की वजह से उन्हें अपनी रोज़ की मॉर्निंग वॉक छोड़नी पड़ी है। उनका कहना है कि सुबह के समय प्रदूषण का स्तर काफी अधिक होता है, जबकि शाम को हवा तुलनात्मक रूप से थोड़ी बेहतर रहती है। इसलिए अब वे सुबह के बजाय शाम को ही टहलने निकलते हैं।

उनका यह बयान न केवल व्यक्तिगत अनुभव को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजधानी की वायु कितनी खतरनाक स्थिति में पहुँच चुकी है। जब देश के शीर्ष न्यायाधीश तक सुबह घर से बाहर निकलने में असहज महसूस कर रहे हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सुबह के समय हवा जमीन के करीब अधिक ठहरती है, जिससे प्रदूषक तत्व नीचे की ओर जमा रहते हैं। इसी कारण मॉर्निंग वॉक करना स्वास्थ्य के लिए अधिक जोखिम भरा हो गया है।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल दंडात्मक कार्रवाई या अस्थायी उपायों से नहीं होगा। इसके लिए दीर्घकालिक, समन्वित और वैज्ञानिक रणनीति की आवश्यकता है। पराली जलाना हो, वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियाँ या औद्योगिक धुआँ—इन सभी पर संयुक्त रूप से काम करना जरूरी है। जस्टिस सूर्यकांत का यह बयान संदेश देता है कि अब प्रदूषण सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है, जिस पर तुरंत और प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

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