भारत में चुनाव सुधारों और मतदाता सुविधा को बढ़ाने के लिए कई नई व्यवस्थाएँ लागू की जा रही हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है—ऐसा गणना फॉर्म (Enumeration Form) भरने की सुविधा, जो उन लोगों को भी उपलब्ध है जिनका स्थायी घर या निवास स्थान तय नहीं है। यानी अगर किसी मतदाता के पास अपना स्थायी घर नहीं है, वह किराए पर रहता है, अस्थायी रूप से किसी जगह काम करता है, या बेघर है—फिर भी वह मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है। यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूत करने और अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान सूची से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता पंजीकरण सिर्फ घर के दस्तावेज़ों पर निर्भर नहीं है। अगर मतदाता का स्थायी घर नहीं है, तो भी वह अपने निवास या रहने की स्थिति को प्रमाणित कर सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग “धारा 20” के अंतर्गत विशेष प्रावधान देता है, जिसमें बेघर, फुटपाथ पर रहने वाले, या अस्थायी ठिकानों पर रहने वाले लोग भी अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनकी स्थिति का सत्यापन करके रिपोर्ट तैयार करते हैं।
ऐसे लोगों के लिए प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है—
फॉर्म-6 भरें: यह नया मतदाता पंजीकरण फॉर्म है, जिसे ऑनलाइन या ऑफलाइन भरा जा सकता है।
पता प्रमाण की जगह स्थान सत्यापन: यदि कोई दस्तावेज़ नहीं है, तो BLO मौके पर जाकर व्यक्ति की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करता है।
पहचान दस्तावेज़ आवश्यक: आधार कार्ड, राशन कार्ड, या कोई भी सरकारी पहचान उपलब्ध होनी चाहिए।
स्थायी पते की आवश्यकता नहीं: ऐसी स्थिति में निवास स्थान ‘जहाँ व्यक्ति वास्तव में रहता है’ माना जाता है।
सत्यापन पूरा होने पर नाम शामिल: रिपोर्ट सही मिलने पर मतदाता का नाम आधिकारिक सूची में दर्ज कर दिया जाता है।
इस नई व्यवस्था से हजारों अस्थायी मजदूर, प्रवासी श्रमिक, झुग्गी-बस्तियों और फुटपाथ पर रहने वाले नागरिक भी लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न सिर्फ मतदान प्रतिशत बढ़ाएगा बल्कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों की आवाज़ को भी मजबूती देगा।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी नागरिक का मतदान अधिकार उसकी आर्थिक स्थिति या रहने की परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। यही वजह है कि मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक लचीला और समावेशी बनाया गया है, ताकि हर व्यक्ति अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग कर सके।
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हाल की एक घोषणा में, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी नागरिक का कोई स्थायी घर नहीं है या वह अस्थायी रूप से कहीं रह रहा है — तब भी वह गणना (एनुमरेशन) फॉर्म भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकता है। यानी ‘स्थायी पते’ की कमी अब वोटर होने का रोड़ा नहीं है।
देश में कई लोग — प्रवासी कामगार, अस्थायी श्रमिक, बेघर व्यक्ति, किराएदार — स्थायी पता नहीं रखते। मतदान से वंचित रहना उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग की पहल से, ऐसे लोग भी Voter-list में नाम जोड़वा सकते हैं, जिससे लोकतंत्र अधिक समावेशी बनता है।
नए वोटर बनना हो — Form 6 भरें। वोटर पहले से हों — उन्हें विशेष गणना/एनुमरेशन फॉर्म (Enumeration Form / EF) देना होगा।
यदि आपके पास कोई “पता प्रमाण” (जैसे बिजली-बिल, रेंट एग्रीमेंट आदि) नहीं है, तब भी आवेदन किया जा सकता है; आप निम्न में से अन्य पहचान-दस्तावेज़ दे सकते हैं: आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि।
अस्थायी निवासी, बेघर, किराएदार, प्रवासी — सभी आवेदन कर सकते हैं; उनके स्थान (जहाँ वे रहते हैं) को ही ‘आवासी पता’ माना जाएगा।
फॉर्म प्राप्त करना और जमा करना आसान है: फॉर्म — ऑनलाइन ( वोटर सेवा पोर्टल या BLO ऐप ) या ऑफलाइन — बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) से मिल सकता है।
सत्यापन: अगर कोई पते का प्रमाण नहीं देता, तो BLO या स्थानीय अधिकारी उसकी स्थायी/अस्थायी स्थिति की पुष्टि कर सकते हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि “घर-न होने” या “पता-दस्तावेज़ की कमी” को मतदाता बनने से वंचित करने का आधार नहीं माना जाएगा।
उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक — चाहे स्थायी घर हो या न हो — मतदान के अधिकार का लाभ उठा सके।
प्रवासी श्रमिक, अस्थायी मजदूर, किराएदार — जिनके पास अपना स्थायी घर नहीं।
बेघर नागरिक, फुटपाथ या अस्थायी शरण-स्थल पर रहने वाले लोग।
ऐसे लोग जिनका नाम पूर्व वोटर-सूची (2003 आदि) में नहीं था, या जिनकी स्थिति बदल चुकी है।
वर्तमान समय में कई राज्यों में चल रही प्रक्रिया Special Intensive Revision (SIR) के अंतर्गत, मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण हो रहा है। गणना फॉर्म इसी क्रम की एक कड़ी है।
स्थानीय अधिकारियों (BLO) ने हर घर — चाहे उसमें स्थायी निवासी हो या अस्थायी — जाकर फॉर्म वितरित/भरे जाने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
यह पहल उन अनदेखे, अस्थायी या दलित लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों के द्वार खोलती है — जो पारंपरिक मतदाता पंजीकरण नियमों में छूट जाते थे। अगर आप चाहें, तो मैं देख सकता हूँ कि आपके राज्य (उत्तर प्रदेश) में यह प्रक्रिया कब पूरी हो रही है — ताकि पता चल सके कि आपके लिए आवेदन करना अभी संभव है या नहीं।