Shashi Tharoor Controversy: वायरल वीडियो पर कांग्रेस सांसद का जवाब, लोगों से पूरी बात सुनने की अपील

Shashi Tharoor ने वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए कहा कि उनका बयान संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि पूरी बात सुनें और अफवाहों पर भरोसा न करें। Indian National Congress ने भी उनका समर्थन किया।

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विवादित वीडियो पर शशि थरूर की सफाई, कहा- तोड़-मरोड़कर पेश की गई बात

Shashi Tharoor के कथित पाकिस्तान-तारीफ वाले वीडियो को लेकर सियासत गरमा गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। इस पूरे विवाद पर अब खुद शशि थरूर का बयान सामने आया है।

थरूर ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी भी देश की नीतियों की अंधाधुंध प्रशंसा करना नहीं था, बल्कि क्षेत्रीय शांति और संवाद की आवश्यकता पर जोर देना था। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पूरे बयान को सुनें, न कि सिर्फ कुछ सेकंड की क्लिप के आधार पर राय बनाएं।

सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद

वीडियो सामने आने के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इसे पाकिस्तान के प्रति नरम रुख बताया, तो कुछ ने इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के संदर्भ में दिया गया सामान्य बयान बताया।

थरूर ने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी तेजी से फैलती है, इसलिए नागरिकों को जिम्मेदारी से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखती है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

Indian National Congress की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि थरूर के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनका रिकॉर्ड हमेशा राष्ट्रहित में बोलने का रहा है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी को तोड़ना-मरोड़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

थरूर की लोगों से अपील

शशि थरूर ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी वीडियो या बयान की सच्चाई की पुष्टि करें। उन्होंने कहा कि देश के संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार संवाद आवश्यक है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा स्पष्ट और दृढ़ रहा है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि डिजिटल दौर में जानकारी की सत्यता परखना कितना जरूरी है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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