सावन 2026 का पावन महीना आज से शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में सावन मास को भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से महादेव की उपासना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। कहा जाता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। वहीं कुछ विद्वान इन्हें सत्व, रज और तम गुणों का प्रतिनिधित्व भी मानते हैं।
बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
इससे पापों का नाश और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
दांपत्य जीवन और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पूजा के समय ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ, ताजा और बिना कटे-फटे होने चाहिए। इन्हें उल्टा नहीं बल्कि सही दिशा में शिवलिंग पर अर्पित करना शुभ माना जाता है।
सावन के दौरान श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का जल, दूध, गंगाजल, शहद, दही और घी से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक, सफेद फूल और भस्म अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप और शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
विशेष रूप से सावन के सोमवार का व्रत रखने का भी बड़ा धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इससे विवाह, संतान, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सावन महीने की शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखकर रात्रि में भगवान शिव का चार प्रहरों में अभिषेक और पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर की गई पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसी दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पूरी कर भगवान शिव का जलाभिषेक भी करते हैं।
शिवलिंग पर हल्दी और केतकी का फूल अर्पित न करें।
पूजा में हमेशा ताजा बेलपत्र का ही उपयोग करें।
सात्विक भोजन करें और नशे से दूर रहें।
जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव के मंत्रों का नियमित जाप करें।
सावन के पहले दिन से ही काशी, उज्जैन, देवघर, हरिद्वार, ओंकारेश्वर, महाकाल, बैद्यनाथ धाम और सोमनाथ सहित देश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। कई स्थानों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि भक्तों को दर्शन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आज से शुरू हुआ पवित्र सावन 2026।
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने का विशेष धार्मिक महत्व।
सावन सोमवार और शिवरात्रि का रहेगा खास महत्व।
देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
पूरे सावन में शिव पूजा और रुद्राभिषेक का रहेगा विशेष महत्व।
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