जूडो दुनिया के सबसे लोकप्रिय मार्शल आर्ट्स और ओलंपिक खेलों में से एक है। इसकी शुरुआत जापान में हुई थी। इस खेल में ताकत से ज्यादा तकनीक, संतुलन, गति और रणनीति की अहमियत होती है। खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को सही तकनीक से गिराकर या पकड़ बनाकर मुकाबला जीतता है। यही वजह है कि जूडो को 'सॉफ्ट वे' (The Gentle Way) भी कहा जाता है।
हाल ही में भारतीय खिलाड़ियों अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि ने जूडो को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है।
जूडो मुकाबले में जीत हासिल करने के कई तरीके होते हैं।
इप्पोन जूडो का सबसे बड़ा स्कोर होता है। यदि कोई खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह नियंत्रित तरीके से पीठ के बल गिरा देता है या 20 सेकंड तक सफलतापूर्वक होल्ड कर लेता है, तो उसे इप्पोन मिलता है। इप्पोन मिलते ही मुकाबला तुरंत खत्म हो जाता है और वही खिलाड़ी विजेता घोषित होता है।
यदि थ्रो पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता, लेकिन प्रभावी होता है, तो खिलाड़ी को वाज़ा-अरी मिलता है। दो वाज़ा-अरी मिलकर एक इप्पोन के बराबर माने जाते हैं और खिलाड़ी मुकाबला जीत जाता है।
गलत तकनीक अपनाने, मुकाबले से बचने या नियमों का उल्लंघन करने पर शिडो (Shido) दिया जाता है। लगातार पेनल्टी मिलने पर खिलाड़ी मुकाबला हार सकता है।
मुकाबला निर्धारित समय तक चलता है।
खिलाड़ी को अपने प्रतिद्वंद्वी को तकनीकी रूप से पछाड़ना होता है।
गला दबाने या हाथ लॉक करने जैसी कुछ तकनीकों की अनुमति विशेष नियमों के तहत होती है।
सुरक्षा नियमों का पालन करना सभी खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य है।
इप्पोन – सीधी जीत।
वाज़ा-अरी – आंशिक अंक।
शिडो – चेतावनी या पेनल्टी।
यदि निर्धारित समय तक कोई इप्पोन नहीं मिलता, तो अधिक स्कोर वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। बराबरी की स्थिति में मुकाबला गोल्डन स्कोर तक जा सकता है, जहां पहला निर्णायक स्कोर या प्रतिद्वंद्वी की गलती जीत तय करती है।
भारतीय जूडो खिलाड़ियों अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने शानदार तकनीक, आत्मविश्वास और बेहतरीन रणनीति का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए कठिन मुकाबलों में जीत हासिल की। उनकी इस सफलता ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया।
जूडो में अंक और तकनीक के आधार पर तय होती है जीत।
इप्पोन सबसे बड़ा स्कोर माना जाता है, जिससे मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है।
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन कर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
भारत में जूडो लगातार लोकप्रिय हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अस्मिता डे और हर्ष सिंह का स्वर्ण पदक इस बात का संकेत है कि भारतीय जूडो अब विश्व स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। यह उपलब्धि आने वाले खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ देश में जूडो के विकास को भी नई गति दे सकती है।
जूडो केवल ताकत का खेल नहीं, बल्कि तकनीक, संतुलन, अनुशासन और मानसिक मजबूती की परीक्षा है। इप्पोन, वाज़ा-अरी और शिडो जैसे नियम इस खेल को बेहद रोमांचक बनाते हैं। वहीं, अस्मिता डे और हर्ष सिंह की स्वर्णिम सफलता भारतीय खेल इतिहास में एक नई प्रेरणादायक कहानी जोड़ती है और यह साबित करती है कि मेहनत, धैर्य और सही रणनीति से विश्व मंच पर भी भारत चमक सकता है।