हरीश राणा की अंतिम विदाई का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और आसपास के लोग नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। माहौल इतना गमगीन था कि हर कोई खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
सबसे ज्यादा दर्दनाक पल तब आया जब हरीश के छोटे भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। भाई अपने आंसू रोक नहीं पाया और चिता के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगा। वह बार-बार अपने बड़े भाई को पुकार रहा था। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
"भाई के बिना अब कैसे रहूंगा", छोटे भाई की यह पुकार हर किसी के दिल को झकझोर गई।
हरीश की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि हरीश परिवार का सहारा था और उसकी अचानक मौत ने सभी को अंदर से झकझोर दिया है।
"घर का इकलौता कमाने वाला चला गया", यह कहते हुए एक परिजन की आवाज भर्रा गई।
हरीश के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दोस्तों और जानने वालों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। कई लोग उनके साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो गए।
हरीश राणा सिर्फ एक नाम नहीं थे, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाले इंसान थे। उनके व्यवहार और मिलनसार स्वभाव के कारण हर कोई उनसे जुड़ा हुआ था। उनकी असमय मौत ने सभी को गहरा सदमा दिया है।
हरीश की जिंदगी अचानक थम गई, लेकिन उनके साथ जुड़े लोगों की यादों में वह हमेशा जिंदा रहेंगे। परिवार और दोस्तों के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकेगी।
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