मकर संक्रांति 2026 इस बार आस्था, ज्योतिषीय संयोग और धार्मिक उल्लास का अद्भुत संगम लेकर आई। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। खास बात यह रही कि इस वर्ष मकर संक्रांति पर एकादशी का दुर्लभ संयोग भी बना, जिसने पर्व का महत्व और बढ़ा दिया। इसी कारण देशभर के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
पश्चिम बंगाल के गंगासागर में तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर गंगासागर में स्नान और दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं ने “हर हर गंगे” और “जय गंगासागर” के जयकारों के साथ संगम में डुबकी लगाई।
प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा और व्यवस्था के लिए हजारों पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ की टीमें और मेडिकल स्टाफ तैनात किए गए थे। ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए पूरे मेले की निगरानी की गई।
इस वर्ष मकर संक्रांति पर पौष शुक्ल एकादशी का संयोग बनने से व्रत और दान का महत्व कई गुना बढ़ गया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन स्नान, दान और जप-तप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान किया।
उत्तर भारत में पतंगबाजी की धूम रही
दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया गया
महाराष्ट्र और गुजरात में तिलगुल और पतंग उत्सव छाया रहा
मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और हवन किए गए
एकादशी और मकर संक्रांति का दुर्लभ संयोग
लाखों श्रद्धालुओं ने गंगासागर में किया स्नान
कड़ी सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजाम
देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
मकर संक्रांति 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। गंगासागर से लेकर देश के कोने-कोने तक श्रद्धा और भक्ति का जो दृश्य देखने को मिला, उसने इस दिन को अविस्मरणीय बना दिया।
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