प्रयागराज में माघ मेला 2026 का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर पहले मुख्य स्नान के साथ हो गया। तड़के सुबह से ही संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के जयकारों से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा।
हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण माघ मेले का पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पौष पूर्णिमा को होता है। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान, दान और पूजा-अर्चना की।
संगम तट पर अखाड़ों के साधु-संत, नागा साधु और कल्पवासी बड़ी संख्या में नजर आए। साधुओं के शाही स्नान ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। धर्मध्वजाओं, भजन-कीर्तन और शंखनाद के बीच आध्यात्मिक माहौल देखते ही बन रहा था। कई संतों ने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और सेवा का संदेश भी दिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से साफ-सफाई और नियमों का पालन करने की अपील की है।
माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे कई प्रमुख स्नान पर्व मनाए जाएंगे। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। माघ मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक भी पेश करता है।
पौष पूर्णिमा पर पहला मुख्य स्नान संपन्न
लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई आस्था की डुबकी
साधु-संतों और अखाड़ों की भव्य मौजूदगी
सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद
माघ मेला 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि संगम केवल नदियों का मिलन नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का महासंगम है।
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