नई दिल्ली। UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इन नियमों को लेकर मोदी सरकार और BJP पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी का कहना है कि केंद्र सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जातिगत भेदभाव को खत्म करने में पूरी तरह नाकाम रही है और नए नियम हालात सुधारने के बजाय उन्हें और जटिल बना रहे हैं।
ओवैसी ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर देने की बात करता है, लेकिन UGC के हालिया नियम इस भावना के खिलाफ हैं। उनके मुताबिक, इन नियमों से दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों को नुकसान होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार सच में समानता चाहती है तो शिक्षा संस्थानों में प्रतिनिधित्व और अवसर क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे?
“सरकार सिर्फ बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जातिगत भेदभाव आज भी मौजूद है,” ओवैसी ने कहा।
इस मुद्दे पर AIMIM और BJP आमने-सामने आ गई हैं। BJP नेताओं का कहना है कि नए UGC नियमों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और संस्थानों में पारदर्शिता लाना है। वहीं, ओवैसी का आरोप है कि ये नियम केंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं और राज्यों व अल्पसंख्यक संस्थानों की स्वायत्तता को कमजोर करते हैं।
ओवैसी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में आरक्षण, फेलोशिप और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों पर लगातार कटौती हुई है, जिससे गरीब और वंचित तबके के छात्र प्रभावित हुए हैं।
ओवैसी ने जोर देकर कहा कि शिक्षा सामाजिक न्याय का सबसे बड़ा माध्यम है। अगर इसमें ही असमानता होगी, तो समाज में बराबरी कैसे आएगी? उन्होंने सरकार से मांग की कि UGC नियमों की समीक्षा की जाए और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर बदलाव किए जाएं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना जैसे अहम मुद्दों से बचती रही है, जबकि वास्तविक सुधार के लिए सही आंकड़ों का होना जरूरी है।
BJP की ओर से जवाब देते हुए नेताओं ने कहा कि ओवैसी राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैला रहे हैं। उनके मुताबिक, नए नियम मेरिट और समावेशन दोनों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, रिसर्च और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
UGC नियमों को लेकर यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गूंज सकता है। साफ है कि AIMIM Vs BJP की यह लड़ाई सिर्फ नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के बड़े सवालों से जुड़ी हुई है।
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