देश के जाने-माने शिक्षाविद, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उनका आंदोलन लद्दाख से जुड़े मुद्दों को लेकर नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहेगा। इसी मांग को लेकर उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, जिसने पूरे देश में शिक्षा सुधार पर नई बहस छेड़ दी।
शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।
20 दिन से अधिक समय तक केवल नमक और पानी के सहारे रहने से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई।
दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहां उनका इलाज जारी है।
सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। यह आंदोलन उन छात्र संगठनों के समर्थन में शुरू किया गया, जो कथित NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। वांगचुक ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास का सवाल है।
सोनम वांगचुक की प्रमुख मांग थी कि शिक्षा व्यवस्था में सामने आए कथित घोटालों और अनियमितताओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की भी मांग की। उनका कहना था कि जब तक छात्रों का भरोसा दोबारा नहीं जीता जाएगा, तब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार अधूरा रहेगा।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। बताया गया कि उनका वजन लगभग 9 किलोग्राम तक कम हो गया और वे लंबे समय तक केवल नमक और पानी के सहारे रहे। डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई और समय-समय पर उनकी मेडिकल जांच की गई।
इस दौरान देशभर के कई छात्र संगठनों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों ने उनके आंदोलन का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में व्यापक अभियान चलाया गया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग तेज होती गई।
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई। अदालत ने प्रशासन को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी जांच करती रही। आखिरकार अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से अस्पताल लेकर गई, ताकि उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सके।
फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन की मूल मांगें अभी भी कायम हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए बिना आंदोलन का उद्देश्य पूरा नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, सरकार की ओर से उनकी सभी मांगों को स्वीकार किए जाने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, छात्रों के भविष्य, जवाबदेही और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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