आज सावन 2026 का पहला सोमवार है। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का सोमवार सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शिव पूजा करने पर भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सुबह से ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध और शहद से भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं।
हिंदू धर्म में सावन मास भगवान शिव को समर्पित माना गया है। विशेष रूप से सोमवार का दिन शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग का अभिषेक करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। अविवाहित युवक-युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं।
सावन के पहले सोमवार पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रदोष काल तक शिव पूजा करना शुभ माना जाता है।
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः लगभग 4:20 बजे से 5:05 बजे तक
सुबह पूजा का श्रेष्ठ समय: सूर्योदय के बाद से दोपहर तक
प्रदोष काल: सूर्यास्त के बाद का समय भी शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
ध्यान दें: अपने शहर के पंचांग के अनुसार पूजा का समय थोड़ा अलग हो सकता है।
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इन वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है—
गंगाजल से अभिषेक करें।
बेलपत्र तीन पत्तियों वाला अर्पित करें।
कच्चा दूध चढ़ाएं।
दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
धतूरा और भांग अर्पित करें।
सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
अक्षत (चावल) और सफेद फूल चढ़ाएं।
मौसमी फल और प्रसाद अर्पित करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी, केतकी का फूल और तुलसी दल अर्पित नहीं करना चाहिए।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। सबसे पहले शिवलिंग का जल और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। फिर पुनः स्वच्छ जल अर्पित करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, फूल और फल अर्पित करें। अंत में "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें और शिव आरती के साथ पूजा पूर्ण करें।
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धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे दांपत्य जीवन में सुख, परिवार में शांति, आर्थिक उन्नति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। कई श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर शाम को पूजा के बाद फलाहार करते हैं।
यदि मंदिर में अधिक भीड़ हो तो प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। ऑनलाइन दर्शन की सुविधा उपलब्ध होने पर उसका भी लाभ लिया जा सकता है। पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और जल का अनावश्यक उपयोग न करें। श्रद्धा, संयम और सच्चे मन से की गई शिव आराधना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
आज सावन 2026 का पहला सोमवार है।
भगवान शिव के अभिषेक के लिए गंगाजल, दूध और बेलपत्र सबसे शुभ माने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप शुभ माना जाता है।
श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
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