संसद के बजट सत्र का आज नौवां दिन है और लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक माहौल पूरी तरह सियासी गर्माहट से भरा हुआ है। विपक्षी दलों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध लगातार बना हुआ है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। अहम मुद्दों पर चर्चा की बजाय आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
आज के सत्र में विपक्षी दलों ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विपक्ष की मांग है कि इन मुद्दों पर तत्काल और विस्तृत चर्चा कराई जाए।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार संसद को सिर्फ औपचारिकता बना रही है और जनहित से जुड़े सवालों से बच रही है।
विपक्ष ने कहा – “जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करेगी, सदन सुचारू रूप से नहीं चलने दिया जाएगा।”
वहीं सरकार का कहना है कि वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन नियमों और संसदीय मर्यादाओं के तहत। संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष बार-बार नारेबाजी कर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है, जिससे जरूरी विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि बजट सत्र का उद्देश्य विकास, आर्थिक नीतियों और जनकल्याण योजनाओं पर चर्चा करना है, न कि राजनीतिक टकराव।
गतिरोध के चलते आज भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सांसदों ने अपने मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद अध्यक्ष और सभापति को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।
आज सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने और बजट पर आगे की चर्चा कराने की योजना है। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों के अनुदान मांगों पर भी बहस प्रस्तावित है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि ये चर्चाएं सुचारू रूप से हो पाएंगी या नहीं।
देश की जनता की निगाहें इस बजट सत्र पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे जुड़े फैसलों का सीधा असर आम आदमी की जेब और भविष्य पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो यह संसद की कार्यकुशलता और लोकतांत्रिक छवि दोनों पर सवाल खड़े करेगा।
संसद के बजट सत्र का 9वां दिन भी तनावपूर्ण माहौल में गुजरने के आसार हैं। सरकार और विपक्ष के बीच टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कोई सहमति का रास्ता निकलता है या बजट सत्र यूं ही हंगामे की भेंट चढ़ता रहेगा।
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