महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए आरोप लगाया है कि कुछ सांसदों के फोन बंद कर दिए गए हैं और उन्हें 15 करोड़ रुपये तक का लालच दिया जा रहा है। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
संजय राउत ने कहा कि विपक्षी नेताओं और सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव बनाकर जनप्रतिनिधियों को अपने पक्ष में करने का प्रयास हो रहा है।
संजय राउत के मुताबिक, कुछ सांसदों से संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनके फोन बंद हैं। उन्होंने दावा किया कि इन सांसदों को भारी रकम और राजनीतिक फायदे का प्रस्ताव दिया जा रहा है।
हालांकि, अभी तक इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बयानबाजी बताया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त जैसी बातें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
संजय राउत ने सांसदों को 15 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया।
कुछ सांसदों के फोन बंद होने का दावा किया गया।
सत्ताधारी पक्ष ने आरोपों को खारिज किया।
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर तेज हुई बयानबाजी।
विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में पहले भी कई बार राजनीतिक समीकरण अचानक बदले हैं। ऐसे में संजय राउत के बयान ने आगामी रणनीतियों और गठबंधन की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक जांच होगी या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा।
फिलहाल 15 करोड़ रुपये देने और सांसदों के फोन बंद होने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में आधिकारिक बयान और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
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