वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर दी गई छूट को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं और कई देश वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में हैं।
रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद कुछ देशों को सीमित शर्तों के साथ तेल खरीदने की अनुमति दी गई थी। इस छूट के तहत भारत कम कीमत पर रूसी तेल आयात कर सकता है। अब इस अवधि को बढ़ाने से भारत को ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी और आयात लागत पर भी नियंत्रण रहेगा।
सस्ती दरों पर तेल – रूस से मिलने वाला कच्चा तेल आमतौर पर बाजार भाव से सस्ता होता है, जिससे भारत की तेल आयात लागत कम होगी।
महंगाई पर नियंत्रण – पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत – लगातार सप्लाई मिलने से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना आसान होगा।
रिफाइनरी सेक्टर को लाभ – भारतीय रिफाइनरियां सस्ते तेल को प्रोसेस कर बेहतर मुनाफा कमा सकती हैं।
इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखने को मिल सकती है। जहां एक ओर पश्चिमी देश रूस पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं, वहीं भारत जैसे बड़े आयातक देशों को दी गई यह छूट भूराजनैतिक संतुलन का संकेत देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह छूट अस्थायी है और भविष्य में इसे लेकर नई शर्तें लागू हो सकती हैं। इसलिए भारत के लिए यह जरूरी है कि वह ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और अन्य आपूर्ति चैनलों पर भी ध्यान बनाए रखे।
Read More: Parliament LIVE: महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में आज गरमागरम बहस, हिबी ईडन का विरोध नोटिस