मुरादाबाद में उस समय सियासत गरमा गई जब करणी सेना के योगेंद्र सिंह राणा द्वारा कैराना की समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद इकरा हसन पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला सामने आया। इस टिप्पणी को लेकर इलाके के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में जबरदस्त आक्रोश है। इसके बाद कटघर थाने में योगेंद्र राणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और अब उनकी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
मामला तब और बढ़ गया जब सपा की महिला नेता सुनीता सिंह ने इस टिप्पणी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और मुरादाबाद पुलिस प्रशासन को तहरीर सौंपी। सुनीता सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि योगेंद्र सिंह राणा ने इकरा हसन पर न सिर्फ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि उसे सोशल मीडिया पर प्रचारित भी किया, जिससे महिला सांसद की गरिमा को ठेस पहुँची है। सुनीता ने इसे न सिर्फ़ एक महिला पर हमला बताया, बल्कि इसे समाज की संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी बताया।
सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को एसपी सिटी कुमार रण सिंह से मुलाकात कर उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और कार्रवाई की मांग की। सुनीता सिंह ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा कि योगेंद्र सिंह राणा ने जानबूझकर एक महिला जनप्रतिनिधि को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया है, जो महिलाओं की गरिमा और संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए योगेंद्र राणा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 79, 356 (2) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर लिया। इन धाराओं में किसी की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुँचाना, किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री फैलाना जैसे अपराध शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, राणा ने खुद को करणी सेना का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बताया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मामला दर्ज होने के बाद भी योगेंद्र राणा ने अपनी टिप्पणी पर न तो खेद जताया और न ही माफ़ी मांगी। बल्कि, रविवार को उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से एक और पोस्ट शेयर की और माफ़ी मांगने से साफ़ इनकार कर दिया। यह रवैया न सिर्फ़ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देता है, बल्कि समाज में महिलाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठाता है।
पुलिस अधिकारी कुमार रण सिंह ने मीडिया को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी गई है और राणा की गिरफ़्तारी की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क़ानून के मुताबिक़ उचित कार्रवाई की जाएगी और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सोशल मीडिया का इस्तेमाल अनियंत्रित तरीके से किया जाता है, तो यह किस हद तक समाज को बांट सकता है और महिलाओं को अपमानित कर सकता है। सांसद इकरा हसन पर की गई अभद्र टिप्पणी को न केवल सपा कार्यकर्ताओं ने गंभीरता से लिया, बल्कि आम नागरिकों ने भी इसकी निंदा की।
सपा नेताओं ने इसे महिलाओं की गरिमा और लोकतंत्र के खिलाफ बताया है और मांग की है कि योगेंद्र राणा को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और एक मिसाल कायम की जाए ताकि भविष्य में कोई जनप्रतिनिधि, खासकर महिला नेता, ऐसी अभद्रता न कर सके।
अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी कार्रवाई करती है और योगेंद्र राणा की जल्द गिरफ्तारी होती है या नहीं। लेकिन एक बात तो तय है कि यह मामला राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा और महिलाओं के सम्मान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह घटना एक मिसाल बन सकती है।