उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद से ही परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नाव जैसे ही यमुना नदी में आगे बढ़ी, उसमें सवार लोगों को असामान्य हलचल और डगमगाहट महसूस होने लगी। कुछ यात्रियों ने नाविक को सावधान भी किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अचानक नाव का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गई, जिससे लोग पानी में गिर पड़े।
जांच में शुरुआती तौर पर जो कारण सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। बताया जा रहा है कि नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे, जिससे संतुलन बिगड़ गया। इसके अलावा, नाव पर सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी भी थी—न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध थे और न ही कोई आपातकालीन व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घाट पर अक्सर नियमों की अनदेखी की जाती है, लेकिन प्रशासन ने कभी सख्ती नहीं दिखाई।
एक बचने वाले यात्री ने बताया, "जैसे ही नाव चली, हमें डर लगने लगा था। नाव हिल रही थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया।"
यह बयान हादसे की भयावहता को साफ दर्शाता है।
घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक इस तरह की लापरवाही लोगों की जान लेती रहेगी। अगर समय रहते नियमों का पालन कराया जाता, तो शायद ये 10 जिंदगियां बच सकती थीं।
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