मेटा का नया दांव: हिंदी जानने वालों को मेटा हर घंटे देगा ₹5,000, जानें क्या करना होगा काम…

मेटा भारत में एआई चैटबॉट्स को स्थानीय रंग देने की तैयारी में है। कंपनी अमेरिका में उच्च-भुगतान वाले ठेकेदारों को नियुक्त कर रही है, जो हिंदी समेत कई भाषाओं में चैटबॉट्स को प्रशिक्षित करेंगे। बदले में कंपनी उन्हें मोटी रकम देगी।

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सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी अमेरिका में ठेकेदारों को नियुक्त कर रही है, जिनका काम हिंदी भाषा में ऐसे एआई चैटबॉट बनाना है, जो इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और मैसेंजर जैसे प्लेटफॉर्म पर सांस्कृतिक और क्षेत्रीय स्पर्श के साथ उपयोगकर्ताओं को जोड़ सकें।

कौन कर रहा है भर्ती?

क्रिस्टल इक्वेशन और एक्वेंट टैलेंट जैसी स्टाफिंग एजेंसियों को इन पदों के लिए नियुक्त किया गया है। आवेदकों को हिंदी, स्पेनिश, पुर्तगाली या इंडोनेशियाई भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए। साथ ही, उम्मीदवारों को कहानी कहने, चरित्र डिजाइन और एआई कंटेंट वर्कफ़्लो में कम से कम छह साल का अनुभव होना चाहिए।

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आपको अच्छी सैलरी मिलेगी

मेटा एआई चैटबॉट्स के लिए ठेकेदारों की नियुक्ति कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी इन ठेकेदारों को प्रति घंटे के हिसाब से भुगतान करेगी, जो अधिकतम 55 डॉलर प्रति घंटा (भारतीय रुपये में लगभग ₹4,850) तक हो सकता है।

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पहले भी किए गए प्रयोग

मेटा ने इससे पहले भी एआई चैटबॉट्स के साथ कई प्रयोग किए थे। कंपनी ने एक बार सेलिब्रिटी अल्टर-इगो बॉट्स पेश किए थे, जिन्हें बड़े सितारों ने आवाज़ दी थी। हालाँकि, यह प्रोजेक्ट ज़्यादा सफल नहीं रहा। इसके बावजूद, इसने कंपनी को एआई स्टूडियो जैसे प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च करने की दिशा दिखाई, जिसे 2024 में पेश किया गया और जिसके ज़रिए कोई भी उपयोगकर्ता अपने चैटबॉट बना सकता है।

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भारत क्यों महत्वपूर्ण है?

मेटा का इस बार का निवेश दर्शाता है कि भारत न केवल एक बड़ा उपयोगकर्ता आधार है, बल्कि संस्कृति-संवेदनशील एआई तकनीक के लिए एक परीक्षण स्थल भी है। इन ठेकेदारों द्वारा विकसित चैटबॉट न केवल एक तकनीक होंगे, बल्कि स्थानीय भाषाओं में मेटा की डिजिटल आवाज़ भी होंगे। यदि यह रणनीति सफल होती है, तो यह दक्षिण एशिया सहित कई बाजारों में एआई-आधारित चैटबॉट्स का स्वरूप बदल सकती है।

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