भारत दौरे पर पुतिन: 2022 के बाद पहली ऐतिहासिक यात्रा में क्या होगा खास?

रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत दौरे पर PM मोदी संग रात्रिभोज, राजघाट पर श्रद्धांजलि और कई द्विपक्षीय समझौतों की घोषणा करेंगे। यह यात्रा रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

ad

भारत दौरे पर क्या-क्या करेंगे पुतिन?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  4–5 दिसंबर 2025 को भारत आ रहे हैं, उनका यह भारत दौरा इस समय वैश्विक राजनीति और भारत-रूस संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद। यह उनकी पहली भारत-यात्रा है। जो इस समय भू-राजनीतिक संतुलन, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक रणनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रही है। यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस साझेदारी की नई दिशा तय करने की कोशिश है।

1. प्रधानमंत्री मोदी के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक

इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली विस्तृत बातचीत है। दोनों नेता रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, अंतरिक्ष और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे।
इस मीटिंग को Strategic Vision 2030 को आगे बढ़ाने का अवसर माना जा रहा है।

2. रक्षा सहयोग पर बड़े समझौते

भारत-रूस रक्षा रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। इस विज़िट के दौरान निम्न क्षेत्रों में प्रगति की उम्मीद है:

  • S-400 सिस्टम की आगे की सप्लाई टाइमलाइन

  • सु-30 एमकेआई अपग्रेड प्रोग्राम

  • रक्षा उत्पादन में "मेक इन इंडिया" मॉडल

  • ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट का विस्तार

इन समझौतों से भारत की सैन्य क्षमता और स्वदेशी उत्पादन को नई गति मिलने की संभावना है।

3. ऊर्जा सुरक्षा और तेल-गैस पर नए करार

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में रूस वर्तमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पुतिन के दौरे में दोनों देश:

  • लंबी अवधि के तेल-गैस कॉन्ट्रैक्ट

  • एटॉमिक पावर प्लांट्स में सहयोग

  • LNG सप्लाई समझौतों

पर विशेष रूप से जोर दे सकते हैं। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।

Read Also: दिल्ली-मुंबई में कई एयरपोर्ट्स के पास फ्लाइट्स के GPS डेटा से छेड़छाड़, सरकार ने संसद में बताया

4. व्यापार और भुगतान प्रणाली पर चर्चा

पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस एशियाई देशों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है। भारत और रूस रुपया-रूबल लेनदेन, डिजिटल मुद्रा सहयोग और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर बातचीत कर सकते हैं। इससे द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ेगा।

5. वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर रणनीतिक संवाद

यूक्रेन संकट, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बदलती शक्ति समीकरण और BRICS-SCO जैसे मंचों की भूमिका पर भी दोनों देशों का गहन संवाद होने की उम्मीद है। यह वार्ता भारत की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नीति को आगे बढ़ाने में अहम होगी।

निष्कर्ष

पुतिन का यह भारत दौरा केवल वर्तमान साझेदारी की मजबूती नहीं, बल्कि भविष्य की सामरिक, आर्थिक और तकनीकी दिशा तय करने वाला आयोजन माना जा रहा है। इसमें लिए गए निर्णय आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं—जहां सहयोग सिर्फ रक्षा या ऊर्जा तक सीमित न रहकर वैश्विक मुद्दों के समाधान तक फैलेगा।

Read Also: दिल्ली कमला पसंद-राजश्री पान मसाला मालिक की बहू ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट मिला

%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4+%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%87+%E0%A4%AA%E0%A4%B0+%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%A8%3A+2022+%E0%A4%95%E0%A5%87+%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6+%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80+%E0%A4%90%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE+%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82+%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE+%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8%3F