नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सोमवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा। जंतर-मंतर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे संसद मार्ग तक पहुंच गया, जहां हालात कई बार बेकाबू होते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज और बल प्रयोग किया। कई स्थानों पर पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी दोनों घायल हुए।
करीब 20 वर्षों बाद ऐसा देखने को मिला जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद भवन के बेहद नजदीक तक पहुंच गए। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती साबित हुई और पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती करनी पड़ी।
सुबह जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों और समूहों के लोग अपनी मांगों को लेकर एकत्र हुए थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।
हालांकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करने में सफल रहे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थर फेंके जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
प्रदर्शन के कारण संसद मार्ग, विजय चौक और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल और सख्त कर दिया गया। कई प्रमुख रास्तों पर यातायात रोक दिया गया और लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई।
संसद भवन की सुरक्षा में तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए गए और पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया।
दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है और हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने हिंसा, पत्थरबाजी या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है।
दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई को उचित बताया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि संसद की सुरक्षा के लिहाज से यह घटना गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि लंबे समय बाद प्रदर्शनकारी संसद परिसर के इतने करीब तक पहुंचने में सफल रहे।
जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन संसद मार्ग तक पहुंचा।
20 साल बाद प्रदर्शनकारी संसद भवन के बेहद करीब पहुंचे।
बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
कई जगहों पर पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं।
संसद परिसर के आसपास हाई अलर्ट घोषित किया गया।
कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए, जांच जारी है।
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।